परे तुम से न जा पाऊँ, मिटा दूँ साँस तुम पे ही ।
कभी चुपके चले आओ, बिछा दूँ राह तुम पे ही ।
कि तुम बिन रात आधी है, अधूरी जन्म की बातें,
भरे इस दर्द के वन में, लुटा दूँ हास तुम पे ही ।।
कहो तुम देखते हो क्या,बड़े ही मनचले हो क्या ?
बुझे उस दीप की लौ में, निभा दूँ रात तुम पे ही ।।
बिठाया होंठ पर जो तिल, तुझी को ताकता रहता ,
पलक तुमसे चमकते हैं, सजा दूँ आँख तुम पे ही ।।
धड़कती सौ तरह धड़कन, पिया का नाम रहता है,
बुलातीं हैं तुझे जुल्फ़ें, भुला दूँ शाम तुम पे ही ।।
कभी चुपके चले आओ, बिछा दूँ राह तुम पे ही ।
कि तुम बिन रात आधी है, अधूरी जन्म की बातें,
भरे इस दर्द के वन में, लुटा दूँ हास तुम पे ही ।।
कहो तुम देखते हो क्या,बड़े ही मनचले हो क्या ?
बुझे उस दीप की लौ में, निभा दूँ रात तुम पे ही ।।
बिठाया होंठ पर जो तिल, तुझी को ताकता रहता ,
पलक तुमसे चमकते हैं, सजा दूँ आँख तुम पे ही ।।
धड़कती सौ तरह धड़कन, पिया का नाम रहता है,
बुलातीं हैं तुझे जुल्फ़ें, भुला दूँ शाम तुम पे ही ।।

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