आओ कभी तो सिरहाने तो बैठो,
मृतप्राय देह की आयु बढ़ाओ ।
चूमो हृदय को हृदय से तो अपने,
श्वेतार्क सा बंधन श्वेत बनाओ ।
ठहर जाऊँ आकर के आँगन में तेरे,
वहीं संग में मेरे जन्में बिताओ ।
समर्पित तुम्हीं पर हों सौभाग्य सारे ,
मुझ पर तुम अर्पित अश्रु कराओ ।
सदियों में ऐसा कभी ना हुआ जो,
ईश्वर सी गाथा कोई सजाओ ।
मैं लिखूँ तुम्हें ही प्रतिदिन क्षितिज पर,
वहीं से वो गीतें सभी को सुनाओ ।
उजियारे सदा ही हों जीवन में तेरे ,
मन में भी मेरा दीप जलाओ ।
मृतप्राय देह की आयु बढ़ाओ ।
चूमो हृदय को हृदय से तो अपने,
श्वेतार्क सा बंधन श्वेत बनाओ ।
ठहर जाऊँ आकर के आँगन में तेरे,
वहीं संग में मेरे जन्में बिताओ ।
समर्पित तुम्हीं पर हों सौभाग्य सारे ,
मुझ पर तुम अर्पित अश्रु कराओ ।
सदियों में ऐसा कभी ना हुआ जो,
ईश्वर सी गाथा कोई सजाओ ।
मैं लिखूँ तुम्हें ही प्रतिदिन क्षितिज पर,
वहीं से वो गीतें सभी को सुनाओ ।
उजियारे सदा ही हों जीवन में तेरे ,
मन में भी मेरा दीप जलाओ ।





