सीने में तेरे छिपना है ,
स्थान कोई बनाओ न ।
जग से मन ये दुखता है ,
तुम ही जग बन जाओ न ।
पिघले चंदा बदन पर मेरे ,
मैं तेरे बदन को तड़पूं ।
तकना चाहे प्रभा मुझे ,
मैं तेरे दरस को तरसूं ।
सुमन सुगन्धित हो मुझसे ,
पर मैं तेरे स्वेद से महकूं ।
हूँ मैं शीतल वायु जैसी,पर
जब-तब तेरे विरह में दहकूं ।
जनम-जनम से प्यासी हूँ,
सुरभोग प्रीत का लाओ न ।
जग से मन ये दुखता है ,
तुम ही जग बन जाओ न ।।
हाथों पर जब तुम हाथ रखो ,
प्रेमी घाटी में खो जाऊँ ।
उंगली में हो फँसी उंगलियाँ ,
काँधे पर तेरे सो जाऊँ ।
जीवन-चक्र पर बढ़ते-बढ़ते ,
प्रेम गली में रुक जाऊँ ।
उम्र बिता दूँ तुझमें ही बस ,
साँसों में तेरे थम जाऊँ ।
तुझ संग पल-पल मरना है ,
जीवन तुम्हीं हराओ न ।
जग से मन ये दुखता है ,
तुम ही जग बन जाओ न ।।।
स्थान कोई बनाओ न ।
जग से मन ये दुखता है ,
तुम ही जग बन जाओ न ।
पिघले चंदा बदन पर मेरे ,
मैं तेरे बदन को तड़पूं ।
तकना चाहे प्रभा मुझे ,
मैं तेरे दरस को तरसूं ।
सुमन सुगन्धित हो मुझसे ,
पर मैं तेरे स्वेद से महकूं ।
हूँ मैं शीतल वायु जैसी,पर
जब-तब तेरे विरह में दहकूं ।
जनम-जनम से प्यासी हूँ,
सुरभोग प्रीत का लाओ न ।
जग से मन ये दुखता है ,
तुम ही जग बन जाओ न ।।
हाथों पर जब तुम हाथ रखो ,
प्रेमी घाटी में खो जाऊँ ।
उंगली में हो फँसी उंगलियाँ ,
काँधे पर तेरे सो जाऊँ ।
जीवन-चक्र पर बढ़ते-बढ़ते ,
प्रेम गली में रुक जाऊँ ।
उम्र बिता दूँ तुझमें ही बस ,
साँसों में तेरे थम जाऊँ ।
तुझ संग पल-पल मरना है ,
जीवन तुम्हीं हराओ न ।
जग से मन ये दुखता है ,
तुम ही जग बन जाओ न ।।।

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