जब निकलोगे ढूँढने
आशियाना
उसकी पलकों तले,
याद रखना
स्थान शेष नहीं है वहाँ
तुम्हारे ठहरने के लिए ।
उसकी घनी पलकों की
सघन छाँव में
तुमसे पहले ही
कुछ जिद्दी से सपने
डेरा डालकर
तय कर चुके हैं
स्थान अपना ।
तुम्हें क्या लगता है
यूँ ही खूबसूरत हैं
उसकी आँखें
या फिर तुम्हारे इश्क़ में
सँवर गयीं हैं?
नहीं, यह तो जादू है
उन बागी, अड़ियल और
सामाजिक भाषा में
ढीठ सपनों का;
जिन्हें वह बड़ी सहजता से
छुपा लेती है यदा-कदा,
कभी रसोई के
मेवों वाले डिब्बे में,
तो कभी
आरती वाली पुस्तक में ।
छत का वह कोना
उसे इसीलिए प्रिय है क्योंकि
उसने देखा है
वह उमड़ता हुआ
बेख़ौफ़ पागलपन,
जो तुमने भी नहीं देखा ।
उसकी मासूम आँखों से
छलकते बूँद
गंगाजल से क्यों लगते हैं,
मालूम भी है?
हिमालय सरीखे
उच्च स्वप्नों का स्पर्श पा
ना जाने कितने ईंटों का
घाव सहा है उन्होंने,
तब जाकर मिली है
उसके गालों की भूमि ।
उसकी पलकों में
रहना चाहते हो?
तो करना होगा
समझौता तुम्हें
उन हठी सपनों से,
उसको अपनाने से पूर्व
स्वीकारना होगा
उसके प्यारे सपनों को ।
एक प्रेम-पत्र
उन्हें भी लिखना मन से,
कुछ गीतों का उपहार
उन पागल से
सपनों को भी देना ।
शर्तों का पुलिंदा
ना पेश़ करना उसके सामने,
चुनाव की नीति तो
उसे कभी ना बताना ;
क्योंकि
खाली तो कर देगी
तुम्हारे कहने पर
अपनी खूबसूरत पलकें
अंध-प्रेम में,
पर क्या रह पाओगे तुम
खंडहर से दिखने वाले
एक निर्जन से मकान में
ताउम्र??
आशियाना
उसकी पलकों तले,
याद रखना
स्थान शेष नहीं है वहाँ
तुम्हारे ठहरने के लिए ।
उसकी घनी पलकों की
सघन छाँव में
तुमसे पहले ही
कुछ जिद्दी से सपने
डेरा डालकर
तय कर चुके हैं
स्थान अपना ।
तुम्हें क्या लगता है
यूँ ही खूबसूरत हैं
उसकी आँखें
या फिर तुम्हारे इश्क़ में
सँवर गयीं हैं?
नहीं, यह तो जादू है
उन बागी, अड़ियल और
सामाजिक भाषा में
ढीठ सपनों का;
जिन्हें वह बड़ी सहजता से
छुपा लेती है यदा-कदा,
कभी रसोई के
मेवों वाले डिब्बे में,
तो कभी
आरती वाली पुस्तक में ।
छत का वह कोना
उसे इसीलिए प्रिय है क्योंकि
उसने देखा है
वह उमड़ता हुआ
बेख़ौफ़ पागलपन,
जो तुमने भी नहीं देखा ।
उसकी मासूम आँखों से
छलकते बूँद
गंगाजल से क्यों लगते हैं,
मालूम भी है?
हिमालय सरीखे
उच्च स्वप्नों का स्पर्श पा
ना जाने कितने ईंटों का
घाव सहा है उन्होंने,
तब जाकर मिली है
उसके गालों की भूमि ।
उसकी पलकों में
रहना चाहते हो?
तो करना होगा
समझौता तुम्हें
उन हठी सपनों से,
उसको अपनाने से पूर्व
स्वीकारना होगा
उसके प्यारे सपनों को ।
एक प्रेम-पत्र
उन्हें भी लिखना मन से,
कुछ गीतों का उपहार
उन पागल से
सपनों को भी देना ।
शर्तों का पुलिंदा
ना पेश़ करना उसके सामने,
चुनाव की नीति तो
उसे कभी ना बताना ;
क्योंकि
खाली तो कर देगी
तुम्हारे कहने पर
अपनी खूबसूरत पलकें
अंध-प्रेम में,
पर क्या रह पाओगे तुम
खंडहर से दिखने वाले
एक निर्जन से मकान में
ताउम्र??


