स्वीकार है मुझे
शून्य होना ।
हाँ स्वीकार है
तुच्छ होना ।
स्वयं जो अस्तित्वहीन
हो कर
समूचे ब्रह्मांड को
निर्मित कर दे ,
ओजपूर्ण है
ऐसा शून्य होना ।
साथ देने पर आऊँ
तो मूल्य बढ़ा दूँ ,
नष्ट करना चाहूँ
तो विलोप वहीं कर दूँ ,
गौरवान्वित है
ऐसा शून्य होना ।
स्वीकार है मुझे
शून्य होना ।
पूरी ना हो मुझ बिन
कोई गणना ,
मुझ बिन संभव
कोई अनुमान नहीं,
दुःख-सुख स्रोत
सभी मैं होऊँ ,
जिसका ना हो मापन
वो अंतरिक्ष मैं होऊँ ।
सौंदर्यपूर्ण है
ऐसा शून्य होना ।
हाँ स्वीकार है मुझे
अमूल्य होना ।
शून्य होना ।
हाँ स्वीकार है
तुच्छ होना ।
स्वयं जो अस्तित्वहीन
हो कर
समूचे ब्रह्मांड को
निर्मित कर दे ,
ओजपूर्ण है
ऐसा शून्य होना ।
साथ देने पर आऊँ
तो मूल्य बढ़ा दूँ ,
नष्ट करना चाहूँ
तो विलोप वहीं कर दूँ ,
गौरवान्वित है
ऐसा शून्य होना ।
स्वीकार है मुझे
शून्य होना ।
पूरी ना हो मुझ बिन
कोई गणना ,
मुझ बिन संभव
कोई अनुमान नहीं,
दुःख-सुख स्रोत
सभी मैं होऊँ ,
जिसका ना हो मापन
वो अंतरिक्ष मैं होऊँ ।
सौंदर्यपूर्ण है
ऐसा शून्य होना ।
हाँ स्वीकार है मुझे
अमूल्य होना ।



