Saturday, November 23, 2019

वो जो कुछ धब्बे हैं न चंद्रमा पर ....

वो जो कुछ धब्बे हैं न
चंद्रमा पर ,
वो नहीं दिखाते
उसकी कुरूपता,
उसकी कमी,
अपूर्णता उसकी
परिलक्षित नहीं करते ।
वो बताते हैं कि
आदर्श कुछ नहीं होता,
पूर्णतया शुद्ध
कुछ नहीं होता ।
प्रतिशतता में शतांक
संभव नहीं ,
असंभव है किसी से
पूर्णता की अपेक्षा ।
व्यक्तित्व में होते हैं
दोनों ही ..
गुण-दोष, श्वेत-अश्वेत,
मीन-मेख,वेग-उद्वेग ।
भाग-निर्धारण
स्वयं ही करना है ,
स्वयं ही बनाने हैं
धन-ऋण के पाई चार्ट ।
धनात्मकता अधिक हुई तो
चंद्र का उजला भाग हो तुम..
जिसे देख
धब्बे भुला दिये जाते हैं व
यदि नकारात्मकता अधिक हुई,
तो वो धब्बा तुम ही हो ,
जो संपूर्ण प्रकाश निगल
मात्र अंधकार उगलता है ,
बन जाता है प्रतीक
चिर कुरूपता का ।।


4 comments:

  1. बेहतरीन दार्शनिक अभिव्यक्ति ।चिरंजीवी भव 👌👌👌👌

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  2. ग़ज़ब श्री 💐💐💐💐

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