Wednesday, October 16, 2019

तुम्हारा ख्याल

तुम्हारा ख्याल ...
तुम्हारा ख्याल सूरज की किरनों संग आता है ,
और तारों की छाँव तक साथ निभाता है ।

सुबह उठने पर जो पहली स्पष्ट
तस्वीर होती है न आँखों में,
वो तुम्हारी होती है ।
और नींद आने से पहले जो जरूरी बातें
करनी होतीं हैं खुद से ,
वो भी तुम्हारी होतीं हैं।

तुम्हारे एहसास  मुझसे बँध से गये हैं ,
बिल्कुल वैसे ही जैसे ...
मन्नतों वाले धागे पेड़ों से बँधे होते हैं।

अब तो मेरा दुपट्टा भी तुम्हें बुलाता है ,
उसको भी इंतजार है कि कब
तुम पीछे से आकर अपनी उंगलियों में
उसे दबा लो ।

मेरी कलम तो पहले ही तुम्हारी हो चुकी है ,
जब भी लिखती है तुम्हें ही लिखती है ।
उसे भी बेपनाह मुहब्बत है तुमसे ।

मेरी आँखें तो इतराती हैं खुद पर
क्योंकि उनमें चेहरा जो तुम्हारा होता है ,
सपने भी तुम्हारे रहते हैं। और आँसू...
आँसू भी तुम्हारे ही नाम के होते हैं।

मैं अपनी जुल्फें अक्सर बाँध कर ही रखती हूँ ,
क्योंकि जब-जब ये खुलते हैं
तुम्हारी शरारतें याद आतीं हैं ।
याद आतीं हैं वो बातें कि
खुले बालों में मैं तुम्हें अच्छी लगा करती थी ।
मेरी एक उंगली से अपने बालों को कान के पीछे करना
तुम्हें घायल कर जाता था ।

मेरे पास ऐसी अनगिनत यादें हैं ,
जो हर दिन मेरी मुहब्बत को फिर से नया कर जातीं हैं ।
हर रोज फिर से मुहब्बत करने का कारण दे जातीं हैं ।

पर मेरे होंठ अक्सर रूठे से रहते हैं मुझसे ,
उन्हें कभी इजाजत नहीं दी न मैंने
तुम्हारा नाम लेने की ।
उनके हिस्से तो बस मुस्कुराहट ही आयी है,
जो तुम्हारे कारण और भी मासूम हो जाती है ।

अब तो आदत सी हो गयी है तुम्हें सोचने की ,
ना सोचूं तो कुछ अधूरा सा लगता है ।
हर पल मुझे खूबसूरत और हसीन बना जाते हैं,
तुम्हारे ख्याल .....
©अनुश्री 'श्री'✍️


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