Wednesday, August 21, 2019

प्रतीक्षा

प्रतीक्षा ...
जैसे कोई उलझन
उलझे केश
सजाने की ,
व्याकुलता कोई
जैसे
अमरत्व पा लेने की ,
क्षण-क्षण
पावक को
अपना मन सौंपना ..
जैसे
बहती लहरों को
आँखों में भर लेना ।

प्रतीक्षा ...
भावों का आग्रह ,
हठता ..जैसे
चंद्र क्रीड़ की ,
धुंधलेपन में
जैसे
सौंदर्य निहार लेने की ,
पग-पग
राहों पर
अपने स्वप्न सींचना ..
जैसे
घनी निशा को
हौले से भोर कर लेना ।।

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