Wednesday, August 14, 2019

भारत माता

बहे सुधा आँचल में तेरे,
नद वंदन तेरा किया करे,
मुख तेरा पावन क्षीर सा,
हिम शोभित ललाट किया करे ।

त्रि-दिशीय सागर खारे,
चरणों से तेरे निर्मल हों,
छूकर तेरे वस्त्र सुनहरे,
मही माँ हरित-लेप स्व किया करे ।

तुम संस्कृति, तुम संस्कार भी,
सभ्यता मनुज की तुम ही हो,
युगों-युगों की तुम रक्षक, माते !
कल्प निर्मण तुमसे निज किया करे ।

विश्व गुरु हम तुमसे ही हैं ,
तुम सौंदर्या खग-स्वर्णा हो ,
कर तेरे मनहर कुसुम उगे,
केश तुम्हारे अंध हर किया करे ।

नवीन वेश में कुछ तुम प्राची हो ,
जंजीरें तोड़ीं तुमने,तुम अवतारी हो,
दंश सहा वर्ष -वर्षों तक, माँ!
स्नेहोपचार सपूत अब किया करे ।

अंचल तेरे रक्त सुशोभित ,
वीरों ने तुमको उपहार दिये ,
वैभव अमर,कहानी उज्ज्वल ,
मन-तन अर्पित तुमको किया करे ।।।

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