सृजनता ..
सदा ही प्रिय होती है
सर्जक को ,
सृजनता के क्रम में
जीता है वह
प्रति क्षण को ,
प्रकृति से सभी मोह
अंजुरी में ले
भर लेता है
नयन संग हृदय में ,
सृजनता का
विकास
शनैः शनैः
विकसित करता है
सर्जक को भी ,
प्रहरी की भाँति
रक्षा करता है
सर्जक
सृजनता की ..
विपदाओं से बचाते
झोंक देता है
स्वयं को
सृजन की निगरानी में ,
सृजनता ..
चाहे शिशु हो ,पौध हो
या कोई लेख
सदा ही प्रिय होती है
सर्जक को ....
सदा ही प्रिय होती है
सर्जक को ,
सृजनता के क्रम में
जीता है वह
प्रति क्षण को ,
प्रकृति से सभी मोह
अंजुरी में ले
भर लेता है
नयन संग हृदय में ,
सृजनता का
विकास
शनैः शनैः
विकसित करता है
सर्जक को भी ,
प्रहरी की भाँति
रक्षा करता है
सर्जक
सृजनता की ..
विपदाओं से बचाते
झोंक देता है
स्वयं को
सृजन की निगरानी में ,
सृजनता ..
चाहे शिशु हो ,पौध हो
या कोई लेख
सदा ही प्रिय होती है
सर्जक को ....
No comments:
Post a Comment