आँखें ढूँढ रही हैं मेरी ,
एक प्रकाश के दीप को ।
जो मुझसे रूठ गया,
खोज रही उस मीत को ।
साँसें हुईं अधीर सी ,
नैनों में अरमान पले ।
एक जागृत सपने की खातिर ,
लड़ती रही लकीर से ।
सहृदय प्रतीक्षा जिसकी, हे भगवन्!
पता दो मेरा उस जीत को।
मैं बावली; क्या जानूँ तुम्हारे नियम ,
एक बार, बस एक बार
मेरे पक्ष में कर दो तुम अपनी रीत को ।
मालूम है इतिहास मुझे,
समय रहा नहीं किसी के हाथ में ।
मिलता है वो ही बस जो होता है भाग्य में।
पर मन की तड़पन को कैसे मैं आराम दिलाऊँ?
सपनों में खोये हृदय पर कैसे विराम लगाऊँ?
विजय धुन सिखला दो मुझे,
गा सकूँ फिर उस गीत को ।
कुछ नहीं तो साहस ही प्रदान करो इतना ,
कर सकूँ पराजय मैं जीवन के हर पीर को ।।
एक प्रकाश के दीप को ।
जो मुझसे रूठ गया,
खोज रही उस मीत को ।
साँसें हुईं अधीर सी ,
नैनों में अरमान पले ।
एक जागृत सपने की खातिर ,
लड़ती रही लकीर से ।
सहृदय प्रतीक्षा जिसकी, हे भगवन्!
पता दो मेरा उस जीत को।
मैं बावली; क्या जानूँ तुम्हारे नियम ,
एक बार, बस एक बार
मेरे पक्ष में कर दो तुम अपनी रीत को ।
मालूम है इतिहास मुझे,
समय रहा नहीं किसी के हाथ में ।
मिलता है वो ही बस जो होता है भाग्य में।
पर मन की तड़पन को कैसे मैं आराम दिलाऊँ?
सपनों में खोये हृदय पर कैसे विराम लगाऊँ?
विजय धुन सिखला दो मुझे,
गा सकूँ फिर उस गीत को ।
कुछ नहीं तो साहस ही प्रदान करो इतना ,
कर सकूँ पराजय मैं जीवन के हर पीर को ।।
Bahut khoob
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