नहीं चाहती करना
हर किसी से
अपने मन की बातें...
अन्तर्मुखी हूँ थोड़ी -सी,
छुपा कर ही रखती हूँ
अपने कुछ गूढ़ रहस्य ..
अधिक कुछ चाह
यदि उठी तो..
पन्ने पर उकेर देती हूँ
हृदय के कुछ चित्र ,
मैं अपने मुख से
कुछ नहीं कहती,
मात्र लेखन को
माध्यम बना लेती हूँ ..
मुझे समझने के प्रयास में
समय व्यर्थ ना करना..
कभी अग्नि हूँ, कभी वायु..
मात्र अनुभूत हो सकती हूँ ...
साथ यदि देना चाहो
तो स्वागत है,
अन्यथा मैं स्वयं के साथ
तो हूँ ही
व प्रसन्न भी हूँ ....
हर किसी से
अपने मन की बातें...
अन्तर्मुखी हूँ थोड़ी -सी,
छुपा कर ही रखती हूँ
अपने कुछ गूढ़ रहस्य ..
अधिक कुछ चाह
यदि उठी तो..
पन्ने पर उकेर देती हूँ
हृदय के कुछ चित्र ,
मैं अपने मुख से
कुछ नहीं कहती,
मात्र लेखन को
माध्यम बना लेती हूँ ..
मुझे समझने के प्रयास में
समय व्यर्थ ना करना..
कभी अग्नि हूँ, कभी वायु..
मात्र अनुभूत हो सकती हूँ ...
साथ यदि देना चाहो
तो स्वागत है,
अन्यथा मैं स्वयं के साथ
तो हूँ ही
व प्रसन्न भी हूँ ....
Bahut badhiya
ReplyDelete