इस धूप के सफ़र में
फूलों सा बदन
कुम्हलाया जा रहा है मेरा ...
बाट जोह रही है आँखें
कुछ शीतल पवनों की ..
भरी दुपहरी चाकरी करते
जी अलसाया जा रहा है मेरा ...
#अनुश्री_श्री
फूलों सा बदन
कुम्हलाया जा रहा है मेरा ...
बाट जोह रही है आँखें
कुछ शीतल पवनों की ..
भरी दुपहरी चाकरी करते
जी अलसाया जा रहा है मेरा ...
#अनुश्री_श्री
👌👌
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