सुंदरता जब अभिशाप लगे ,
जीवन भर का भार लगे ,
आकर्षित हो जब कोई नोचे ,
प्रेम कटु आघात लगे....
तोड़ के सारे पिंजर, शुका !
तुम नील गगन उड़ जाना ..
ना आना रस घोली बातों में ,
ठाठ-बाट से मुंह फिराना ...
स्वर्णिम पंख तुम्हारे सुन लो ,
कटने को ना उत्पन्न हुए ...
मीठे बोल तुम्हारे शुग्गा ,
विवशे क्यों व्युत्पन्न हुए ...
स्त्री जैसे तुम भी हो ,
उस जैसा ही चक्र तुम्हारा ..
तोड़ के बेड़ी गुलामी वाली ,
स्वातंत्र्य का उसको पाठ पढ़ाना..
रिश्ते जब कटु आहार लगें ,
प्रति क्षण डँसता नाग लगें ..
अपमानों की ही वर्षा हो ,
प्रेम क्षणिक एहसास लगे ...
छोड़ के झूठे महल, वनिता !
तुम अपने झोपड़ में आ जाना...
ना सहना तुम अपराधों को ,
नियति अपनी निज पा जाना ।।।
जीवन भर का भार लगे ,
आकर्षित हो जब कोई नोचे ,
प्रेम कटु आघात लगे....
तोड़ के सारे पिंजर, शुका !
तुम नील गगन उड़ जाना ..
ना आना रस घोली बातों में ,
ठाठ-बाट से मुंह फिराना ...
स्वर्णिम पंख तुम्हारे सुन लो ,
कटने को ना उत्पन्न हुए ...
मीठे बोल तुम्हारे शुग्गा ,
विवशे क्यों व्युत्पन्न हुए ...
स्त्री जैसे तुम भी हो ,
उस जैसा ही चक्र तुम्हारा ..
तोड़ के बेड़ी गुलामी वाली ,
स्वातंत्र्य का उसको पाठ पढ़ाना..
रिश्ते जब कटु आहार लगें ,
प्रति क्षण डँसता नाग लगें ..
अपमानों की ही वर्षा हो ,
प्रेम क्षणिक एहसास लगे ...
छोड़ के झूठे महल, वनिता !
तुम अपने झोपड़ में आ जाना...
ना सहना तुम अपराधों को ,
नियति अपनी निज पा जाना ।।।
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