यह जीवन तो विरह में बीता,
अन्य लोक में मिलें कभी।
तुम रहना बस हम होंगे ,
दृग में चंदा जले कभी।
निर्मित करना छोटी कुटिया ,
मैं उसको घर कर दूँगी ।
तुम बोना कुछ पुष्प प्रेम के ,
मैं उनमें रंग भर दूँगी ।
जब-जब सूरज तापे मुझको ,
बन कर साँझ चले आना ।
रहना मुझमें मेरा बनकर ,
'मैं-तुम' संग 'हम' बनें कभी ।
यह जीवन तो विरह में बीता,
अन्य लोक में मिलें कभी ।।१।।
मन,मन से ही बतिया लेगा,
नैनों-नैनों में शोर करेंगे ।
कुछ किस्से संबंधों वाले ,
रातें-रातें फिर भोर करेंगे ।
पाठ पढ़ाने ऊँच-नीच का,
कोई ग्रंथ ना आयेगा ।
प्रेम-नगर बसा लेना संग,
प्रेम-ग्रंथ फिर रचें कभी ।
यह जीवन तो विरह में बीता,
अन्य लोक में मिलें कभी ।।२।।
इस पीड़ा को मुस्कान बना
हम खिड़की पर टँक देंगे ।
आँसू लेकर अपने सारे,
सब गागर-सागर भर देंगे ।
भावुकता के मोती से तुम
मेरा शृंगार करा देना ।
मुझको थाम ना पाते हो,
पर एक-दूजे में ढलें कभी।
यह जीवन तो विरह में बीता,
अन्य लोक में मिलें कभी ।।३।।
अन्य लोक में मिलें कभी।
तुम रहना बस हम होंगे ,
दृग में चंदा जले कभी।
निर्मित करना छोटी कुटिया ,
मैं उसको घर कर दूँगी ।
तुम बोना कुछ पुष्प प्रेम के ,
मैं उनमें रंग भर दूँगी ।
जब-जब सूरज तापे मुझको ,
बन कर साँझ चले आना ।
रहना मुझमें मेरा बनकर ,
'मैं-तुम' संग 'हम' बनें कभी ।
यह जीवन तो विरह में बीता,
अन्य लोक में मिलें कभी ।।१।।
मन,मन से ही बतिया लेगा,
नैनों-नैनों में शोर करेंगे ।
कुछ किस्से संबंधों वाले ,
रातें-रातें फिर भोर करेंगे ।
पाठ पढ़ाने ऊँच-नीच का,
कोई ग्रंथ ना आयेगा ।
प्रेम-नगर बसा लेना संग,
प्रेम-ग्रंथ फिर रचें कभी ।
यह जीवन तो विरह में बीता,
अन्य लोक में मिलें कभी ।।२।।
इस पीड़ा को मुस्कान बना
हम खिड़की पर टँक देंगे ।
आँसू लेकर अपने सारे,
सब गागर-सागर भर देंगे ।
भावुकता के मोती से तुम
मेरा शृंगार करा देना ।
मुझको थाम ना पाते हो,
पर एक-दूजे में ढलें कभी।
यह जीवन तो विरह में बीता,
अन्य लोक में मिलें कभी ।।३।।
मनोभाव बेहद मर्मस्पर्शी हैं, और आपकी लेखनी के क्या कहने, सूर्य को दिया दिखाने जैसा होगा।
ReplyDeleteहृदय के कोने कोने को छू लिया इस कृति नें ❤❤ बहुत ही सुंदर
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