कुछ प्रेममयी,कुछ द्वेष रहित,
सौगातें लाने वाला है ..
झमझम जैसी ध्वनियों संग,
अब सावन आने वाला है ।।
नयी-नवेली दुल्हन अब,
पीहर के सपने देखेगी..
प्रियतम की वो बाँहों में,
बन मयूरी अब चहकेगी..
बारिश वाली मिट्टी सी,
मेंहदी सौंधी महकेगी..
आँगन में वो झूले डाले,
संग सुहाग के झूलेगी..
चपला की वो गर्जन सुन,
स्वामी-वक्षों में सहमेगी..
प्रियतम अपनी प्यारी का,
संसार सजाने वाला है...
झमझम जैसी ध्वनियों संग,
अब सावन आने वाला है ।।१।।
सोलह साला कन्या वो,
कुछ नये वेश में सँवरेगी..
हरी चूड़ियों की हरियाली,
अपने तन पर खोजेगी..
वो कागज की नावें उसको,
अब कतई ना भायेंगी..
हर कागज के टुकड़े लेकर,
शब्द प्रेम के जोड़ेगी..
बागों वाले झूले पर वो,
संग सखियों के उछलेगी..
नयी उमर का खेल नया,
उसको तड़पाने वाला है...
झमझम जैसी ध्वनियों संग,
अब सावन आने वाला है ।।२।।
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