बदन की सारी थकन मिटा दो ,
थामो मुझे और गले से लगा लो ।
मैं तन्हा सी कोई बुझती शमा हूँ ,
छू लो मुझे और खुद में जला लो ।
उलझी लटें हैं, साँसें भी बहकीं ,
सुनो, उंगलियों से ज़ुल्फें सजा दो ।
खो कर बहकना तुम्हीं से है साजन ,
मैं सँभलूं तो कैसे, यही तुम बता दो ।
राहों में तेरे मेरी आँखें बिछीं हैं ,
उठा लो उन्हें और पलकें बना लो ।
मुहब्बत की बातें समझो न जानम ,
रूठूं कभी तो मुझे तुम मना लो ।
जरूरी नहीं है होंठों से कहना ,
करके इशारे..इशारे.. जता दो ।
मैं तड़पूं तुम्हारी मुहब्बत की खातिर ,
तुम आओ तभी सौ रातें बिता दो ।।
थामो मुझे और गले से लगा लो ।
मैं तन्हा सी कोई बुझती शमा हूँ ,
छू लो मुझे और खुद में जला लो ।
उलझी लटें हैं, साँसें भी बहकीं ,
सुनो, उंगलियों से ज़ुल्फें सजा दो ।
खो कर बहकना तुम्हीं से है साजन ,
मैं सँभलूं तो कैसे, यही तुम बता दो ।
राहों में तेरे मेरी आँखें बिछीं हैं ,
उठा लो उन्हें और पलकें बना लो ।
मुहब्बत की बातें समझो न जानम ,
रूठूं कभी तो मुझे तुम मना लो ।
जरूरी नहीं है होंठों से कहना ,
करके इशारे..इशारे.. जता दो ।
मैं तड़पूं तुम्हारी मुहब्बत की खातिर ,
तुम आओ तभी सौ रातें बिता दो ।।

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