Wednesday, September 25, 2019

गले से लगा लो

बदन की सारी थकन मिटा दो ,
थामो मुझे और गले से लगा लो ।

मैं तन्हा सी कोई बुझती शमा हूँ ,
छू लो मुझे और खुद में जला लो ।

उलझी लटें हैं, साँसें भी बहकीं ,
सुनो, उंगलियों से ज़ुल्फें सजा दो ।

खो कर बहकना तुम्हीं से है साजन ,
मैं सँभलूं तो कैसे, यही तुम बता दो ।

राहों में तेरे मेरी आँखें बिछीं हैं ,
उठा लो उन्हें और पलकें बना लो ।

मुहब्बत की बातें समझो न जानम ,
रूठूं कभी तो मुझे तुम मना लो ।

जरूरी नहीं है होंठों से कहना ,
करके इशारे..इशारे.. जता दो ।

मैं तड़पूं तुम्हारी मुहब्बत की खातिर ,
तुम आओ तभी सौ रातें बिता दो ।।

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