ना तड़पे जब प्यासे होकर ,
तो कैसा फिर जमजम है ...
क्षुधा समेटा तन ना देखा ,
अथाह पड़ा क्यों सम्पद है ...
किसी गरीब के अश्रु से ,
मन यदि ना भींगा है ..
बेबस अनाथों के रूदन से ,
हृद कभी ना रीता है ..
निरीह पशु के कटने पर ,
आँखों में आग ना उबला तो ..
सौम्य कुसुम का टूट बिखरना ,
साँसें तेरी ना तोड़ा तो ..
परपीड़ा में ना दुःखे हो ,
फिर कैसा सुख संगम है ...
क्षुधा समेटा तन ना देखा ,
अथाह पड़ा क्यों सम्पद है ....
जीवन माया मोह का घेरा ,
इसी बंध में रहना है ..
ऊपर इससे है ही क्या ,
सुख-दुःख सारे सहना है ..
मात-पित्र व प्रेम, सहोदर ,
जीवन के सौंदर्य यही हैं ..
स्वप्न भरे इस ताल नयन में ,
जैसा भी हो स्वर्ग यहीं है ..
परसेवा में ना भटका तो ,
फिर काहे का जीवन है ...
क्षुधा समेटा तन ना देखा ,
अथाह पड़ा क्यों सम्पद है ....
तो कैसा फिर जमजम है ...
क्षुधा समेटा तन ना देखा ,
अथाह पड़ा क्यों सम्पद है ...
किसी गरीब के अश्रु से ,
मन यदि ना भींगा है ..
बेबस अनाथों के रूदन से ,
हृद कभी ना रीता है ..
निरीह पशु के कटने पर ,
आँखों में आग ना उबला तो ..
सौम्य कुसुम का टूट बिखरना ,
साँसें तेरी ना तोड़ा तो ..
परपीड़ा में ना दुःखे हो ,
फिर कैसा सुख संगम है ...
क्षुधा समेटा तन ना देखा ,
अथाह पड़ा क्यों सम्पद है ....
जीवन माया मोह का घेरा ,
इसी बंध में रहना है ..
ऊपर इससे है ही क्या ,
सुख-दुःख सारे सहना है ..
मात-पित्र व प्रेम, सहोदर ,
जीवन के सौंदर्य यही हैं ..
स्वप्न भरे इस ताल नयन में ,
जैसा भी हो स्वर्ग यहीं है ..
परसेवा में ना भटका तो ,
फिर काहे का जीवन है ...
क्षुधा समेटा तन ना देखा ,
अथाह पड़ा क्यों सम्पद है ....

Waah, publish Karne lyk h
ReplyDelete