१--
धूमिल दर्पण माँगत दर्शन,रोवत नैनन में रज लेके ।
टूट कहीं चट से चटके वह, हारत ना हमरे गुण लेके ।
अश्रु भरे दृग पे मल अंजन, गात करो नम चंदन लेके ।
लेप लगा हृदि पे अब प्रीतम, आ बस दर्पण में छवि लेके ।
२--
देख लिया तुझमें जग पूरण,हो तुम जीवन-आँगन मेरे ।
बंदन शेखर का तुमसे घन, हाँ प्रिय हो तुम आँचल मेरे ।
मोद तुम्हीं तुम से दुख आवत, प्रेयस रीति तुम्हीं पिय मेरे ।
थाम मुझे कर दो सरला तुम, मैं मन हो तुम आतम मेरे ।
३--
देख पिया मुख चंचल भावक,भूल गयी सब लाजन मैं तो ।
चूम लिया दृग से चख-मस्तक, डेढ़ गुनी मनभावन मैं तो ।
थाम उसे अपने पलकों पर , बंद करी सब पाटन मैं तो ।
नेह भरे उपमा बनते क्षण, प्रेम पगी सहभागन मैं तो ।।
४--
चारु कपोल भए मनमोहक, दीठ तुम्हें नित साँझ बुलाती ।
केश हुए बदरा जस गाझिन, मैं कर पे पिय नाम गुदाती ।
अंग भरे जिन भी लय से यह, वे सब मोहित गीत बनाती ।
अर्पण है नव यौवन वल्लभ, स्वेद-पिया अब माँग सजाती ।
५--
प्रीतम-बालम-मोहन-साजन, दीपक हो तुम मैं इक बाती ।
मंदिर के तुम हो प्रभु मूरत ,मैं तुम पे यह प्राण लुटाती।
श्लोक गढ़े तुम पे बड़ सुंदर, जो व्रत धार सुहागिन गाती ।
प्रेमिल राग सिखावत हो तुम, मैं हिय के सब गान सुनाती ।।
धूमिल दर्पण माँगत दर्शन,रोवत नैनन में रज लेके ।
टूट कहीं चट से चटके वह, हारत ना हमरे गुण लेके ।
अश्रु भरे दृग पे मल अंजन, गात करो नम चंदन लेके ।
लेप लगा हृदि पे अब प्रीतम, आ बस दर्पण में छवि लेके ।
२--
देख लिया तुझमें जग पूरण,हो तुम जीवन-आँगन मेरे ।
बंदन शेखर का तुमसे घन, हाँ प्रिय हो तुम आँचल मेरे ।
मोद तुम्हीं तुम से दुख आवत, प्रेयस रीति तुम्हीं पिय मेरे ।
थाम मुझे कर दो सरला तुम, मैं मन हो तुम आतम मेरे ।
३--
देख पिया मुख चंचल भावक,भूल गयी सब लाजन मैं तो ।
चूम लिया दृग से चख-मस्तक, डेढ़ गुनी मनभावन मैं तो ।
थाम उसे अपने पलकों पर , बंद करी सब पाटन मैं तो ।
नेह भरे उपमा बनते क्षण, प्रेम पगी सहभागन मैं तो ।।
४--
चारु कपोल भए मनमोहक, दीठ तुम्हें नित साँझ बुलाती ।
केश हुए बदरा जस गाझिन, मैं कर पे पिय नाम गुदाती ।
अंग भरे जिन भी लय से यह, वे सब मोहित गीत बनाती ।
अर्पण है नव यौवन वल्लभ, स्वेद-पिया अब माँग सजाती ।
५--
प्रीतम-बालम-मोहन-साजन, दीपक हो तुम मैं इक बाती ।
मंदिर के तुम हो प्रभु मूरत ,मैं तुम पे यह प्राण लुटाती।
श्लोक गढ़े तुम पे बड़ सुंदर, जो व्रत धार सुहागिन गाती ।
प्रेमिल राग सिखावत हो तुम, मैं हिय के सब गान सुनाती ।।

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