जब भी मिला
प्रेम-प्रस्ताव मुझे,
विश्वास दिलाया गया
कि मैं जग की
विशिष्टतम् स्त्री हूँ!
मुझसा सौंदर्य,
मुझसा तेज,
मुझसा गुण,
मुझसा शील,
अन्य किसी में नहीं !
मानो मुझे पाकर
कोई पुरुष
ऐसे धन्य हो जाये
जैसे ईश-बोध मिले
ध्यान-मग्न संत को !
वस्तुतः ये मात्र
आकर्षक लहरों
के समान थे,
जो उस संबंध में
समा जाने,डूब जाने को
प्रेरित करते थे
व जैसे ही
प्रारंभ किया मैंने
डूबना वहाँ,
अहसास दिलाया गया मुझे
कि ये छलित शब्दों से इतर
कुछ भी नहीं !
संसार की अनगिनत
साधारण स्त्रियों से भिन्न
मेरा कोई अस्तित्व नहीं,
किसी भी प्रकार
मैं विशेष नहीं !
फिर तैरती रही मैं
किसी शव समान
उन्हीं लहरों पर,
अगला प्रेम-प्रस्ताव
आने तक व
चलती रही
यह प्रक्रिया अनवरत !
जब तक ना मिल गया
क्षयी वपु को
अनैच्छिक निर्वाण !!
प्रेम-प्रस्ताव मुझे,
विश्वास दिलाया गया
कि मैं जग की
विशिष्टतम् स्त्री हूँ!
मुझसा सौंदर्य,
मुझसा तेज,
मुझसा गुण,
मुझसा शील,
अन्य किसी में नहीं !
मानो मुझे पाकर
कोई पुरुष
ऐसे धन्य हो जाये
जैसे ईश-बोध मिले
ध्यान-मग्न संत को !
वस्तुतः ये मात्र
आकर्षक लहरों
के समान थे,
जो उस संबंध में
समा जाने,डूब जाने को
प्रेरित करते थे
व जैसे ही
प्रारंभ किया मैंने
डूबना वहाँ,
अहसास दिलाया गया मुझे
कि ये छलित शब्दों से इतर
कुछ भी नहीं !
संसार की अनगिनत
साधारण स्त्रियों से भिन्न
मेरा कोई अस्तित्व नहीं,
किसी भी प्रकार
मैं विशेष नहीं !
फिर तैरती रही मैं
किसी शव समान
उन्हीं लहरों पर,
अगला प्रेम-प्रस्ताव
आने तक व
चलती रही
यह प्रक्रिया अनवरत !
जब तक ना मिल गया
क्षयी वपु को
अनैच्छिक निर्वाण !!

Lovely ❤️❤️❤️❤️🖤🖤🖤❤️❤️❤️❤️
ReplyDeleteअद्भुत।
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