कुछ रिश्ते भूले-बिसरे से,
यादों की झड़ी लगाते हैं।
मौन हुए जो तू-तू मैं से,
दिल में शोर मचाते हैं।
वह अतीत का मुड़ा पन्ना ,
कुछ अक्षर-अक्षर दर्शाता है ।
जो लुप्त हो रहा धूसर से ,
रेखायें उनकी दिखलाता है ।
फटे हुए कुछ पृष्ठ पड़े हैं ,पर
कोना पुस्तक से जुड़ा रहा ।
कथानक उनके अपनेपन से,
जब-तब मन सहलाते हैं ।
कुछ रिश्ते भूले-बिसरे से,
यादों की झड़ी लगाते हैं ।।
स्पर्श तनिक ना रहा अभी,
दूरी ने अधिकार चलाया है ।
वह देहरी का दीप अभागा ,
आँधी से ना लड़ पाया है ।
गिरी हुई कुछ राख शेष है,पर
बादल उनको बहा रहा ।
जो थे अपने पूरक से,
अब दृष्टि से भी कतराते हैं ।
कुछ रिश्ते भूले-बिसरे से,
यादों की झड़ी लगाते हैं ।।।
मनोहर क्षण आह्लादों वाले,
जाने कब के बीत गये ।
स्नेह -प्रेम से ऊपर सब ,
द्वेष -कटुता जीत गये ।
बाहर-बाहर कुछ ना है,पर
भाव सदा ही बना रहा ।
दूर हुए वे जीवन से,
फिर बातों में आ ही जाते हैं ।
कुछ रिश्ते भूले-बिसरे से,
यादों की झड़ी लगाते हैं ।।।।
यादों की झड़ी लगाते हैं।
मौन हुए जो तू-तू मैं से,
दिल में शोर मचाते हैं।
वह अतीत का मुड़ा पन्ना ,
कुछ अक्षर-अक्षर दर्शाता है ।
जो लुप्त हो रहा धूसर से ,
रेखायें उनकी दिखलाता है ।
फटे हुए कुछ पृष्ठ पड़े हैं ,पर
कोना पुस्तक से जुड़ा रहा ।
कथानक उनके अपनेपन से,
जब-तब मन सहलाते हैं ।
कुछ रिश्ते भूले-बिसरे से,
यादों की झड़ी लगाते हैं ।।
स्पर्श तनिक ना रहा अभी,
दूरी ने अधिकार चलाया है ।
वह देहरी का दीप अभागा ,
आँधी से ना लड़ पाया है ।
गिरी हुई कुछ राख शेष है,पर
बादल उनको बहा रहा ।
जो थे अपने पूरक से,
अब दृष्टि से भी कतराते हैं ।
कुछ रिश्ते भूले-बिसरे से,
यादों की झड़ी लगाते हैं ।।।
मनोहर क्षण आह्लादों वाले,
जाने कब के बीत गये ।
स्नेह -प्रेम से ऊपर सब ,
द्वेष -कटुता जीत गये ।
बाहर-बाहर कुछ ना है,पर
भाव सदा ही बना रहा ।
दूर हुए वे जीवन से,
फिर बातों में आ ही जाते हैं ।
कुछ रिश्ते भूले-बिसरे से,
यादों की झड़ी लगाते हैं ।।।।
Sundar rachna😊
ReplyDeleteThank you 😊
DeleteMadhur Rachna.
ReplyDeleteReflecting 'Lalitya Bodh' like Maha Devi Verma and Sumiytra Nandan Pant and Jay Shanker Prasad .
ReplyDeleteधन्यवाद
DeleteBahut sundar
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